~~~…Berang Zindgi…~~~
ज़िंदगी है एक अजब पहेली
कभी नारंगी तो कभी रंगीली
दिलकश नॅज़ारो वाली तो कभी अंधेरी

Not Mine
राते तारे गिन गिन गुज़री
सूरज की किरण दिल को जलती
कुछ बेरेंग हुई है ज़िंदगी
फिलहाल बेढंग हुई है ज़िंदगी
सोचते है ना याद करे बातें पुरानी
पर वो पल पल सीने मे है दुखती
ज़िंदगी अब हुई है नीली
लगती है सीलि सीलि
नही धूफ़ है सिर्फ़ चाव ठंडी
कास्ती और कोस्ती है यह ज़िंदगी
घूता है दम आने दो ताज़गी
बदलेगी रंग अब यह ज़िंदगी
***
zindgi hai ek ajab paheli
kabhi narangi to kabhi rangeeli
dilkash nazaro wali to kabhi andheri
raate tare gin gin guzari
suraj ki kirne hai dil ko jalati
kuch berand hui hai zindgi
filhal bedhang hui hai zindgi
sochte hai na yaad kare baaten purani
par wo pal pal sine main hai dukhti
zindgi aab hui hai neeli
zindgi lagti hai seeli seeli
nahi duph hai sirf chav thandi
kasti aur kosti hai yeh zindgi
ghuta hai dum aane do tazgi
badlegi rang aab yeh zindgi
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