Dard – ek dastan

कभी कभी ऐसा लगता है ज़िंदगी बवांडर है| एक तूफान है जो थामता ही नही| मंन इतना व्याकुल, विचिलित हो जाता है, किसी पे यकीन करने हो जी नही करता| ऐसा अक्सर तब होता है जब कोई अपना दिल दुखाता है| कोसी को दिल से अपना माना हो और उसका प्यार एक छलावा हो तो| ऐसे हालत में चुल्लू भर पानी में डूब मरने को जी करता है| असली तूफान हो तो उसका सामना किया जाए| बाढ़ आए तो टायर के जान बचना का एक रास्ता तो है| डूबते को तिनके का सहारा ही काफ़ी है| मगर जिसके किसी अपने दुख दिया हो और संग आपके उमीद भी छीन ली हो तो … ऐसे हालातो में इंसान क्या करे? रात भर टेसुए बहाए| दिन में दिखता दिल और झूठी मुस्कान लिए एक ज़िंदा लाश की तरहा जीटा रहे|| ऐसा जीना भी क्या जीना|| मर जाना ही अच्छा प्रतीत होता है|
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September 26th, 2009 at 7:44 pm
Nice One Anita
OMi says:
October 7th, 2009 at 12:57 pm
Dard-e-dastaan ?? kya baat hai.. chaliye dard me hum bhi apka sath dete huyee chand line aarz karte hai..
mulayeja farmayega mohtarma ji..:)
do Ghari Sukoon Ki Khatir
Humne Barson Azaab Jhela Hai…
Uss Se Kehna Aaj bhii Ek Shakhs
iss bheed me ‘Tanha’, akela Hai…